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स्वामी विवेकानंद जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय भाषा आंदोलन द्वारा गोष्ठी आयोजित की गई

आज स्वामी विवेकानंद जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस के शुभ अवसर पर #भारतीयभाषाआंदोलन द्वारा गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें आम जन नव युवकों ने भागीदारी देकर यह आश्वासन दिया है कि वह #भारतीयभाषाआंदोलन के उद्देश्य जनता को न्याय जनता की भाषा में मिले, के साथ रहकर न्यायपालिकाओं की भाषा भारतीय भाषा हो, को जल्द से जल्द स्थापित कराने में सहायक बनेंगे।

भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है लोकतंत्र में आम जन को यह अधिकार है कि वह संगठित होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं जनता को जनता की भाषा में न्याय ना मिलना एक घोर अन्याय हैं देश के नवयुवक भारतीय भाषा आंदोलन के साथ जुड़कर आगे आ रहे हैं जिसमें #बुद्धिजीवी, #साहित्यकार #समाजसेवी, #राजनेता, #समाज_सुधारक, #पत्रकार, #चिकित्सक इत्यादि, आवश्यक है कि देश के युवा भारतीय भाषा आंदोलन के माध्यम से संगठित होकर इस भाषाई अन्याय के खिलाफ ऐसा आंदोलन करे जैसा अंग्रेजों के विरुद्ध गांधी जी ने अहिंसावादी आंदोलन चलाया था,  जिनमें सत्याग्रह, घेराव, विरोध, बंद, सविनय अवज्ञा आंदोलन, जेल भरो आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, अनशन आदि।

#भारतीयभाषाआंदोलन अपनी इस मांग #जनताकोन्यायजनताकीभाषामें_मिले, के लिए पूरे भारत वर्ष में कार्य कर रहा है,

#भारतीयभाषाआंदोलन को कुशल नेतृत्व चरित्रवान निष्ठावान एवं देशभक्त युवाओं की जरूरत है इसलिए न्यायपालिकाओं में हो रही भारतीय भाषाओं की हत्या के इस दौर में राष्ट्रीय भाषा चेतना और भाषाई राष्ट्रभक्ति की मशाल जलाने के लिए आज युवाओं ने संकल्प लिया और अपनी खामोशी को तोड़कर आगे आकर मुखर होकर इस बात का संकल्प लिया है कि जनता को न्याय जनता की भाषा में मिलना अत्यंत आवश्यक है,

सभी भाषा प्रेमियों के ऊपर देश का यह कर्ज है कि भारतीय भाषाएं उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जल्द से जल्द स्थापित हो, भारतीय भाषा आंदोलन संकल्पित है,भारतीय मनीषा और भारतीय संस्कृति तथा भारतीय परंपराओं का कर्ज और भारत माता का कर्ज उतारने के लिए भारतीय भाषा आंदोलन प्रतिबद्ध तथा संकल्पबद्ध है लोकतंत्र और जनता के हित में न्यायपालिकाओं को भी कमर कस कर भारतीय भाषाओं का स्वागत करना होगा पत्रकारों को अपनी कलम के तीर तरकस से और प्रखर प्रहार करने की आवश्यकता है ताकि एक बार इन अंग्रेजी प्रेमी के कानों पर जूं रेंगेगी तभी भारतीय भाषाओं को न्याय मिलेगा।

लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां की जनता अपने अधिकारों अथवा कर्तव्यों के प्रति कितनी सचेत है भारतीय भाषा आंदोलन इन्हीं भाषाई अधिकारों की चेतना जागृत करने के लिए जन जन के बीच जाकर इस चेतना का प्रसार गोष्ठियों के माध्यम से निरंतर करेंगे, यदि न्यायपालिकाओं की भाषा भारतीय भाषा हो जाएगी तो सरकार के ग़लत नीतियों पर नजर रखना आसान होगा, इसीलिए अपने भाषा के प्रति अधिकारों को पहचान कर गलत की आलोचना खुल कर करे, जिस से राजभाषा अधिनियम की अपेक्षा पर अंकुश लगाया जा सके।

Report  : Ajay Jain

Location : Delhi

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