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राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली शांति एवं सद्भाव समिति ने प्रथम दृष्टया गवाहों की तरफ से पेश किए गए रिकॉर्ड और अपराध को बढ़ावा देने वाली सामग्री के आधार पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में फेसबुक की मिलीभगत पाई है

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने फेसबुक की तरफ से घृणा फैलाने वाले भाषण नियमों को लागू करने में जानबूझ कर निष्क्रियता बरतने का आरोप लगाने वाली शिकायतों का हवाला देते हुए फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को समन किया, जिससे कथित तौर पर दिल्ली में शांति भंग हुई थी

  • राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली समिति ने फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को 15 सितंबर को समिति के सामने उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया है, ताकि शिकायतकर्ताओं की शिकायतों की जांच की जा सके
  • फेसबुक इंडिया के उपरोक्त गवाह व प्रतिनिधि को प्रमुख गवाहों के दिए गए तीखे बयानों के साथ-साथ उनकी तरफ प्रस्तुत की गई सामग्री व रिकॉर्ड में दोषी ठहराए जाने के आधार पर समन जारी किया गया
  • गवाहों की तरफ से प्रस्तुत किए गए मजबूत साक्ष्य के संबंध में समिति का मानना है कि फेसबुक को दिल्ली दंगों की जांच में सह-अभियुक्त के रूप में आरोपित किया जाना चाहिए
  • समिति ने अपने अध्यक्ष राघव चड्ढा के माध्यम से अब तक चार अत्यंत महत्वपूर्ण गवाहों की जांच की है, जिनमें प्रख्यात पत्रकार और लेखक परांजॉय गुहा ठाकुर्ता, डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता निखिल पाहवा, वरिष्ठ पत्रकार अवधेश तिवारी, प्रख्यात स्वतंत्र और खोजी पत्रकार कुणाल पुरोहित शामिल हैं
  • अन्य बातों के अलावा परांजॉय गुहा ने स्पष्ट रूप से बयान दिया था कि फेसबुक प्लेटफॉर्म उतना नास्तिक और कंटेंट न्यूट्रल नहीं है, जितना कि वह होने का दावा करता है, साथ ही सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच एक अपवित्र सांठगांठ़ का आरोप लगाया था
  • उल्लेखनीय है कि 31 अगस्त 2020 को छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अवधेश तिवारी ने सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक के अधिकारी अंखी दास पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी
  • गवाह की तरफ से ब्लैक लाइव्स मैटर मूवमेंट के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश में फेसबुक नीतियों के चयनात्मक कार्यान्वयन की प्रक्रिया पर समिति का ध्यान आकर्षित किया था, जबकि भारत में इसकी अनदेखी की गई थी
  • अभी तक सभी गवाह इस बात पर पुरजोर तरीके से सहमत हैं कि दिल्ली दंगों के हुए तांडव और तनाव में फेसबुक की कथित भूमिका और उसकी मिलीभगत की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए
  • दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा को संबोधित कई शिकायतें मिली थीं, जिसमें फेसबुक के संबंधित अधिकारियों पर भारत में घृणा फैलाने वाली सामग्री को कथित रूप से जानबूझ कर अनदेखी का आरोप है
  • शिकायतों में लगाए गए आरोपों पर सावधानी पूर्वक विचार-विमर्श के बाद दिल्ली विधान सभा की समिति ने इस मुद्दे का त्वरित संज्ञान लिया और कार्यवाही शुरू की
  • समिति के कामकाज को अत्यधिक पारदर्शी बनाने और जनता के विश्वास को स्थापित करने के लिए कार्यवाही को लाइव-स्ट्रीम किया जाएगा

नई दिल्ली, 12 सितंबर, 2020

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति की पिछली कार्यवाही के दौरान गवाहों की तरफ से सौंपे गए साक्ष्य और रिकाॅर्ड सामग्री की गंभीरता और गहनता पूर्वक जांच करने के बाद राघव चड्ढा की अध्यक्षता में समिति ने फेसबुक पर लगाए गए गंभीर आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को बुलाने का फैसला लिया है। समिति ने अजीत मोहन को 15 सितंबर को होने वाली कार्यवाही में उपस्थित रहने के लिए औपचारिक नोटिस भेजा है। इस दौरान समिति कुछ और प्राप्त शिकातयों की जांच भी करेगी।

उल्लेखनीय है कि राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली शांति एवं सद्भाव समिति ने प्रथम दृष्टया गवाहों की तरफ से पेश किए गए रिकॉर्ड और अपराध को बढ़ावा देने वाली सामग्री के आधार पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में फेसबुक की मिलीभगत पाई है और साथ ही, समिति के समक्ष गवाहों ने तीखे बयान भी दिए हैं। इसके अलावा समिति ने एक स्वतंत्र जांच की जरूरत का भी आग्रह किया है, ताकि कथित जांच के दौरान सहायक और पुष्ट सामग्री के आधार पर दिल्ली दंगों से संबंधित चल रहे केस में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया जा सके। समिति ने अपनी पिछली कार्यवाही में कई विशेषज्ञों के साथ-साथ स्वतंत्र गवाहों की अच्छी तरह से जांच भी की गई है।

गवाह अवधेश तिवारी ने अपने बयान में बल देकर कहा था कि फेसबुक की मिलीभगत न केवल दिल्ली दंगों को भड़काने तक सीमित है, बल्कि बहुत लंबे समय से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ लगातार नफरत को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने समिति के समक्ष जोर देकर कहा था कि फेसबुक अनिवार्य रूप से अपने प्लेटफार्म पर घृणा फैलाने वाले और विभाजनकारी सामग्री को बढ़ावा देता है, लेकिन साथ ही जानबूझ कर अपने प्लेटफार्म पर ऐसी सामग्री की दृश्यता कम कर देता है या हटा देता है, जिसका उद्देश्य समुदायों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव से ठीक पहले दिल्ली शहर की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया था। उन्होंने अंखी दास और सत्तारूढ़ व्यवस्था के बीच मजबूत गठजोड़ का भी आरोप लगाया था और साथ ही इससे संबंधित कुछ साक्ष्य और सहायक सामग्री भी सौंपी थी।

एक स्वतंत्र पत्रकार और शोधकर्ता कुणाल पुरोहित ने बताया था कि सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच व्यवसायिक लेन-देन है और सरकारी सहयोग के बीच हितों का स्पष्ट टकराव है, जिसके कारण फेसबुक सत्तारूढ़ व्यवस्था के पक्ष में प्रदर्शित सामग्री पर अपनी प्रतिबंधात्मक नीतियों को लागू करने से बचता है। उन्होंने बल देकर यह भी कहा था कि दिल्ली के दंगों से पहले, व्हाट्सएप पर जो कुछ भी हुआ, वह पूर्व नियोजित और पूर्व निर्धारित तरीके से कुछ समुदाय के खिलाफ घृणा पैदा करने और नफरत फैलाने के लिए किया गया था, जो धीरे-धीरे पूरे फेसबुक पर भी फैल गया। गवाह ने यह भी बयान दिया था कि मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था फेसबुक प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा पैसे खर्च करती है।

गौरतलब है कि गुहा ने अपने बयान में स्पष्ट कहा था कि फेसबुक प्लेटफॉर्म कथित तौर पर नास्तिक और कंटेंट न्यूट्रल नहीं है, जितना कि वह दावा करता है। उन्होंने बयान दिया था कि इसे लेकर पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं, जो सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच एक कथित सांठगांठ प्रदर्शित करता है और विरोधाभासी कथनों को कथित तौर पर दबाने की जगह उसे आगे बढ़ावा देता है, जबकि सत्तारूण व्यवस्था की आलोचना वाली सामग्री की दृश्यता को कम कर देते हैं, जो फेसबुक की कथित जटिलता को उजागर करते हैं।

इसके अलावा, यह भी सर्वसम्मति से बयान दिया गया कि उनकी कथित जटिलता और भूमिकाओं का पता लगाने के साथ फेसबुक के कथित दोषी अधिकारियों की भूमिका और मिलीभगत का पता लगाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि दिल्ली दंगों में फेसबुक की भूमिका का पता लगाया जा सके।

दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा को संबोधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसमें आरोप लगाया है कि अपनी व्यापक नीतियों और विनियमों के बावजूद, फेसबुक अपने प्लेटफार्म पर बड़े पैमाने पर घृणित और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री के विनिर्माण और प्रचार को रोकने में असफल है और इसे लेकर अपनी आंखें बंद किए हुए है, जो सामग्री न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि उसमें हिंसा और दंगा जैसी स्थिति को पैदा करने की क्षमता हैं।

शिकायतों और इसके संभावित नतीजों को लेकर लगाए गए आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने मजबूती के साथ इस मुद्दे के समाधान करने का फैसला किया था। साथ ही समिति ने देश भर में कहर बरपाने की संभावना, विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शांति व सद्भाव को भंग करने और सांप्रदायिक वैमनस्यता को बढ़ावा देने की किसी भी गहरी साजिश और सांठगांठ का पता लगाने का फैसला किया था। इसी उद्देश्य से समिति ने यह कार्यवाही शुरू की है और इस मुद्दे को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए तेजी के साथ काम कर रही है।

प्रासंगिक है कि इस मामले को सार्वजनिक महत्व का अधिक होने की वजह से समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा ने पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने का फैसला लिया है, ताकि इसकी पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके और इस कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए मीडिया को भी आमंत्रित किया गया है।

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